Bhagavad Geeta

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    भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 12

    न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः।न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्॥12॥ न-नहीं; तु-लेकिन; एव-निश्चय ही; अहम्-मे; जातु-किसी…

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    भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 11

    श्री भगवानुवाच।अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे ।गतासूनगतासुंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः॥11॥ श्रीभगवान् उवाच-परमप्रभु ने कहा; अशोच्यान्–जो शोक के पात्र नहीं हैं; अन्वशोच:-शोक करते हो;…

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  • भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 10

    तमुवाच हृषीकेशं प्रहसन्निव भारत।सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः ॥10॥ तम्-उससे; उवाच-कहा; हृषीकेश:-मन और इन्द्रियों के स्वामी, श्रीकृष्ण ने; प्रहसन-हँसते हुए; इव-मानो; भारत-भरतवंशी…

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    भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 9

    सञ्जय उवाच। एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप।न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह ॥9॥सञ्जयः उवाच-संजय ने कहा; एवम्-इस प्रकार; उक्त्वा -कहकर;…

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    भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 8

    न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्य-च्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम्।अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धंराज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् ॥8॥ न–नहीं; हि-निश्चय ही; प्रपश्यामि मैं देखता हूँ; मम–मेरा; अपनुद्यात्-दूर कर सके; यत्-जो;…

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  • Bhagwat GeetaDALL·E 2024 02 23 16.40.03 Illustrate a serene and wise guru Dronacharya standing tall and commanding respect dressed in traditional Indian attire that reflects his status as 2 sanatan

    भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 7

    कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः।यच्छ्रेयः स्यानिश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् ॥7॥कार्पण्य-दोष-कायरता का दोष; उपहत-ग्रस्त; स्वभावः-प्रकृति, पृच्छामि में पूछ…

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  • भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 6

    न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः। यानेव हत्वा न जिजीविषाम स्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ॥6॥ न–नहीं; च-और;…

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    भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 5

    गुरूनहत्वा हि महानुभावान् श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके ।हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैव भुजीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान् ॥5॥गुरून्–शिक्षक; अहत्वा-न मारना; हि-निःसंदेह; महा-अनुभावान्-आदरणीय वयोवृद्ध को; श्रेयः-उत्तम;…

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    भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 4

    अर्जुन उवाच।कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन।इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजाह्नवरिसूदन ॥4॥ अर्जुन उवाच-अर्जुन ने कहा; कथम् कैसे; भीष्मम्-भीष्म को; अहम् मे;…

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    भगवद गीता: अध्याय 2, श्लोक 3

    क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ॥3॥क्लैब्यम्-नपुंसकता; मा-स्म-न करना; गमः-प्राप्त हो; पार्थ-पृथापुत्र,अर्जुन; न कभी नहीं; एतत्-यह; त्वयि…

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